जबलपुर में एक महीने में ₹10 महंगा हुआ दूध, 80 रुपये प्रति लीटर पर पहुंची कीमत
जबलपुर में दूध की कीमत एक महीने में 10 रुपये बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर पड़ने वाले असर के बीच राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने प्रशासन से जवाब मांगा है। आखिर कीमतें बढ़ने की वजह क्या है?

Jabalpur Milk Price Hike: महंगाई के बीच आम परिवारों के लिए अब दूध खरीदना भी महंगा हो गया है। बच्चों की जरूरत हो या सुबह की चाय, हर दिन इस्तेमाल होने वाले दूध के लिए लोगों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जबलपुर में एक महीने के भीतर दूध की कीमत 70 से बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी पर राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से कीमतें बढ़ने की वजह की जांच कराने की मांग की है।
दूध महंगा होने से घरेलू बजट पर असर
राष्ट्रीय संघर्ष समिति के मध्यभारत समन्वयक बलवंत सिंह गुर्जर ने कहा कि दूध हर परिवार की दैनिक जरूरत है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के पोषण में इसकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में कम समय में कीमत बढ़ने से मध्यमवर्गीय परिवारों, गरीबों और पेंशन पर निर्भर वरिष्ठ नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि महंगाई का सामना कर रहे परिवारों के लिए दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी परेशानी बढ़ा सकती है।
कीमत बढ़ाने का कारण स्पष्ट करने की मांग
समिति के संभागीय अध्यक्ष देवनारायण तिवारी ने जिला प्रशासन से दूध की कीमतों में वृद्धि के कारणों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दूध विक्रेताओं और दुग्ध आपूर्ति करने वाली संस्थाओं से जानकारी लेकर मूल्यवृद्धि के पीछे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
समिति का कहना है कि यदि कीमतें बढ़ाने के पीछे कोई उचित कारण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को भी इसकी जानकारी मिल सके।
प्रशासन से जरूरी कदम उठाने की मांग
राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन से दूध की कीमतों की निगरानी करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। समिति के अनुसार, दूध जैसे रोजमर्रा के जरूरी खाद्य पदार्थ की कीमत बढ़ने पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल समिति ने मूल्यवृद्धि के कारणों की जांच और दूध की कीमतों को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के संबंध में जिला प्रशासन या दुग्ध आपूर्ति संस्थानों का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





