रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के वीआईपी मूवमेंट की वजह से रुका ट्रैफिक, तो 'Gen-Z' महिला ने सेना के जवानों से कर ली बहस, शुरू हो गया नया विवाद
लद्दाख में रक्षा मंत्री के वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक रोके जाने से भड़की एक महिला पर्यटक ने जवानों से जमकर बहस की। खुद को Gen-Z बताते हुए महिला ने टैक्स और सेना के वेतन पर भी तंज कसा।
लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाके में वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और आम जनता की परेशानी के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है। लद्दाख के जोजिला-गुमरी मार्ग पर स्थित मिनिमार्ग चेकपोस्ट का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल है। इसमें एक महिला टूरिस्ट ट्रैफिक रोके जाने को लेकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों से बुरी तरह से बहस करती दिखाई दे रही है। महिला ने खुद को Gen-Z बताकर सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाए, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर सीमाई क्षेत्रों की सुरक्षा और पर्यटकों को होने वाली दिक्कतों पर बहस छिड़ गई है।
महिला का तंज: हम Gen-Z हैं, टैक्स देते हैं, संसद तक जाएंगे
इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर इसलिए ज्यादा सुर्खियां बटोरीं क्योंकि महिला का बात करने का तरीका बेहद तल्ख था। वो खुलेआम जवानों से कह रही है, ‘We are Gen-Z, we won't tolerate this nonsense.’ खुद को नई जनरेशन का बताकर महिला ने अपने दिए गए टैक्स, सेना के जवानों को मिलने वाले वेतन और इस मामले को सीधे संसद में उठाने तक की धमकियां दे डालीं। इसी एक बयान ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा अपनी तरफ खींचा है।
25 जुलाई का वो दिन जब मौसम ने बदला वीआईपी रूट
सूत्रों की मानें तो यह पूरी हलचल 25 जुलाई की है। उस समय देश के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख को इसी जोजिला-गुमरी रूट से अपना सफर तय करना था। लेकिन अचानक से मौसम खराब हो गया और उनके हेलीकॉप्टर को गुमरी में ही लैंड कराना पड़ा। इसके बाद आगे का पूरा सफर सड़क के रास्ते से हुआ, जिस कारण वीआईपी सुरक्षा के लिए आम ट्रैफिक को कुछ समय के लिए होल्ड करना पड़ा। काफिला गुजरने के तुरंत बाद ही रास्ता आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।
पूर्व सेना अधिकारी जनरल वीके सिंह की सख्त हिदायत
इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ लोग इसे ट्रैफिक की आम झुंझलाहट बता रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के जानकारों ने इसे पूरी तरह से गलत ठहराया है। पूर्व सैन्य अधिकारी जनरल वीके सिंह और अन्य अफसरों ने भी इस पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि संवेदनशील सीमा वाले इलाकों में मौसम या सैन्य कारणों से सड़क का बंद होना एक आम प्रोटोकॉल है। ऐसे में हर नागरिक का ये फर्ज बनता है कि वो वहां के सुरक्षा नियमों को समझे और जवानों का पूरा सम्मान करे।
