विपक्ष के दबाव और बच्चों की मौतों के बीच मोहन सरकार का बड़ा दांव, बालाघाट के आदिवासी अंचल में खर्च होंगे 400 करोड़ रुपये
आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौतों पर चौतरफा दबाव के बाद सीएम मोहन यादव ने बालाघाट के लिए 400 करोड़ रुपये के विशेष विकास पैकेज की कमान संभाली है।

कुपोषण के मुद्दे पर बैकफुट पर आई सरकार का बड़ा कदम
बालाघाट के घने आदिवासी इलाकों में कुपोषण और बदहाली से मासूमों की जान जाने के मामलों ने मध्य प्रदेश की सियासी सरगर्मी बढ़ा दी थी। सरकार पर उठते सवालों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस मामले में दखल दिया और बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए 400 करोड़ रुपये की बड़ी कार्ययोजना को हरी झंडी दिखाई है। इस योजना के तहत जिले के पांच प्रमुख आदिवासी क्षेत्रों किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में 1,500 विकास कार्य एक साल के अंदर पूरे किए जाएंगे, जिससे सड़क, पानी और स्वास्थ्य के साथ सामुदायिक भवन व स्टॉप डैम की पुरानी मांगें पूरी हो सकें।
शीर्ष अफसरों की टीम को मिली मिशन मोड में काम की कमान
राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को सीधे जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को इस पूरे महा-अभियान की सीधी मॉनिटरिंग सौंपी गई है, जिन्होंने इस प्लान को हरी झंडी दे दी है। वहीं, मंत्रालयों के बीच किसी भी तरह की कागजी देरी को रोकने के लिए जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा को नोडल अधिकारी बनाकर 13 अलग-अलग विभागों को एक साथ मैदान में झोंका गया है।
ग्रामीण आधारभूत ढांचे के लिए खुला खजाना
सरकार का मुख्य ध्यान गांवों को सीधे मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने पर है, ताकि आदिवासियों को कटे हुए जीवन से बाहर निकाला जा सके। यही वजह है कि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को सबसे बड़ा जिम्मा दिया गया है। 268.94 करोड़ रुपये की लागत से पांचों ब्लॉकों में 151 सीसी और डामरीकृत सड़कें बनेंगी। इसके अलावा 34.02 करोड़ रुपये खर्च करके 69 पुलिया तैयार होंगी और 35.97 करोड़ रुपये से 60 स्टॉप डैम बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय खेती को भी फायदा पहुंचे।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर साख बचाने की पहल
विपक्ष द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए सरकार ने 20 से ज्यादा नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत सामुदायिक और उपस्वास्थ्य केंद्रों के नए मजबूत भवनों का निर्माण भी किया जाएगा। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली कटने की समस्या न हो, इसलिए वहां सौर ऊर्जा पैनल लगाने का प्रावधान किया गया है, ताकि आदिवासी मरीजों को चौबीसों घंटे बुनियादी इलाज मिल सके।
पीड़ित बैगा-गोंड बस्तियों में सीधे विकास पहुंचाने की रणनीति
डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे घने बैगा और गोंड बहुल गांवों में बच्चों की मौत के बाद प्रशासन पर गहरा रोष था। अब सरकार ने इन गांवों को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है। नल के जरिए शुद्ध पानी पहुंचाने की कमान पीएचई विभाग को दी गई है। लांजी और किरनापुर में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है, और जहां तकनीकी मापदंडों के चलते नल-जल संभव नहीं है, वहां सरकार अन्य वैकल्पिक उपायों से शुद्ध पानी पहुंचाने का वादा कर रही है।





