अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में फिर महसूस हुए भूकंप के तेज झटके, 4.9 तीव्रता की इस प्राकृतिक आपदा ने बढ़ाई प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता
अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप ने सरकारी सिस्टम और राहत एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। 4.9 तीव्रता के झटकों के बाद पूरे इलाके में प्रशासन हालात का मुआयना कर रहा है।

अफगानिस्तान के प्रशासनिक अमले और राहत एजेंसियों के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी चुनौती के साथ शुरू हुआ। भारतीय समयानुसार 5 अक्टूबर 2026 की रात 1:57 बजे देश में 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इतनी तीव्रता का कंपन सिस्टम को अलर्ट करने के लिए काफी था। यह भूकंप सतह से 220 किलोमीटर की गहराई में आया, जिस वजह से इसका दायरा काफी बड़ा था। प्रशासन ने राहत की सांस ली है क्योंकि शुरुआती दौर में किसी भी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है।
फैजाबाद के करीब था भूकंप का मुख्य फोकस
राहत और बचाव एजेंसियों के लिए सबसे जरूरी चीज लोकेशन होती है। NCS के रिकॉर्ड के अनुसार, यह भूकंप ऐसे वक्त पर आया जब आम जनता अपने घरों में सो रही थी। अचानक हुई इस हलचल से घबराए लोग एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकल आए। सरकारी डेटाबेस में इस भूकंप का केंद्र 36.602° उत्तरी अक्षांश और 71.084° पूर्वी देशांतर दर्ज किया गया है। यह जगह रणनीतिक और भौगोलिक रूप से फैजाबाद से करीब 73 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व की दिशा में मौजूद है।
4.9 तीव्रता और सतह पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन
सरकारी और वैज्ञानिक पैमाने पर 4.9 की तीव्रता को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन आपदा प्रबंधन के नजरिए से नुकसान सिर्फ झटकों की तेजी से तय नहीं होता। केंद्र की 220 किलोमीटर की गहराई, इमारतों का ढांचा और आबादी की दूरी इसका सीधा असर तय करते हैं। गहराई ज्यादा होने के कारण सतह पर तबाही नहीं मची, लेकिन कंपन हर जगह अलग-अलग महसूस हुआ। फिलहाल, NCS ने इस पूरी घटना को अपनी आधिकारिक लिस्ट में ‘Felt it’ के रूप में दर्ज कर लिया है।
कमजोर इमारतें और टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता
नीतियों और बुनियादी ढांचे की बात करें, तो अफगानिस्तान हमेशा से एक सक्रिय भूकंपीय गतिविधि वाले क्षेत्र में आता है। जमीन के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल यहां एक रूटीन बन चुकी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी यहां के पहाड़ी इलाके और बिना मानकों के बनी कमजोर इमारतें हैं। जब भी भूकंप आता है, तो इन कमजोर ढांचों के गिरने और पहाड़ी इलाकों में भारी भूस्खलन होने का रिस्क सबसे ज्यादा रहता है।
मॉनिटरिंग जारी, बड़े नुकसान से बचा देश
प्रशासनिक रिपोर्ट्स की मानें तो, इस भूकंप ने फिलहाल कोई बड़ा घाव नहीं दिया है। अभी तक न तो किसी की जान जाने की खबर है और न ही कोई अस्पताल में घायल हालत में पहुंचा है। संपत्ति के बड़े नुकसान का भी कोई डेटा सामने नहीं आया है। हालांकि, ग्राउंड जीरो से पूरी रिपोर्ट आने में हमेशा थोड़ा समय लगता है। झटकों के बाद जनता में जो डर पैदा हुआ था, उसे शांत करने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरी तरह से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।









