क्या सच में सरकार के खजाने पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना? सीएम मोहन यादव के बयान से मची सियासी हलचल
लाड़ली बहना योजना के सियासी और आर्थिक असर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा और बेबाक बयान दिया है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोर रहा है।

मध्य प्रदेश की सियासत में 'लाड़ली बहना योजना' एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर रही है। लेकिन इस योजना के भारी-भरकम बजट को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को हुए बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री ने बहुत ही खुले अंदाज में यह बात मान ली कि जब वे मुख्यमंत्री बने, तो उन्हें इस योजना के इतने बड़े आर्थिक बोझ का जरा भी अंदाजा नहीं था। उनका यह बयान बताता है कि लोकलुभावन योजनाओं को चलाना सरकार के लिए कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
छतरपुर की क्रिएटर से बातचीत में छलका सच
इस सियासी बयान की शुरुआत एक सवाल से हुई। कार्यक्रम में छतरपुर की जानी-मानी कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछ लिया कि बहनों के लिए तो सरकार ने खजाना खोल दिया, अब बेटियों के लिए क्या नया करने वाले हैं? इस पर सीएम मोहन यादव ने हंसते हुए एक ऐसा जवाब दिया जिसने सबका ध्यान खींच लिया। उन्होंने कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।” इस चुटीले जवाब ने पूरे हॉल में ठहाके लगवा दिए।
चुनौतियों के बाद भी 1500 रुपये की पक्की गारंटी
अपने बयान के सियासी मायने साफ करते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत यह भी स्पष्ट कर दिया कि चाहे खजाने पर कितना भी जोर पड़े, बहनों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि यह योजना 1,000 रुपये महीने से शुरू हुई थी और तमाम आर्थिक अड़चनों के बावजूद आज पात्र महिलाओं के खातों में 1,500 रुपये भेजे जा रहे हैं। अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने बिन्नू रानी से मजाक किया कि वो अभी इस योजना के मानकों के हिसाब से छोटी हैं, इसलिए उन्हें इसका फायदा लेने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
युवाओं के 24 घंटे वाले सवाल पर राजनीतिक जवाब
बुंदेलखंड की सियासत हमेशा से बेरोजगारी और सूखे के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इसी कार्यक्रम में जब एक युवा ने सीएम के सामने चुनौती रखी कि वो बुंदेलखंड की कौन सी समस्या 24 घंटे में सुलझाएंगे, तो सीएम ने बहुत ही व्यावहारिक राजनीतिक जवाब दिया। उन्होंने बिना किसी झूठे वादे के कहा कि इन सालों पुरानी समस्याओं को 24 घंटे में सुलझाना संभव नहीं है। उनका यह कहना था कि “बुंदेलखंड की समस्या 24 घंटे में तो भगवान भी हल नहीं कर सकते”, जो वहां की जमीनी हकीकत को बयां करता है।
केन-बेतवा प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड साधने की तैयारी
राजनीतिक नफे-नुकसान की बात करते हुए सीएम ने बुंदेलखंड के सबसे बड़े दर्द 'पलायन' पर हाथ रखा। उन्होंने युवाओं की काबलियत की तारीफ करते हुए कहा कि रोजगार की कमी और सिंचाई का पानी न होने के कारण यहां के लोग पलायन को मजबूर हैं। सरकार की रणनीति अब 'केन-बेतवा' जैसी महापरियोजनाओं के जरिए इस इलाके को साधने की है। अगर इस योजना से किसानों को पर्याप्त पानी मिल गया, तो खेती के साथ-साथ रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और बुंदेलखंड की पूरी अर्थव्यवस्था बदल जाएगी।








