प्रोजेक्ट चीता की बड़ी कामयाबी पर गदगद हुए सीएम मोहन यादव, कूनो की टीम को दी ढेरों बधाई
राज्य सरकार की नीतियों और वन विभाग की कड़ी मेहनत का असर अब कूनो नेशनल पार्क में दिखने लगा है। 5 नए शावकों के जन्म ने प्रोजेक्ट चीता की सफलता पर पक्की मुहर लगा दी है।

प्रोजेक्ट चीता को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की जो बड़ी योजना थी, वह अब कूनो नेशनल पार्क में पूरी तरह से सफल होती दिख रही है। भारतीय धरती पर चीतों की नई पीढ़ी लगातार अपनी जड़ें जमा रही है। हाल ही में 32 महीने की मादा चीता KJP21 द्वारा पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देना सरकार की इस मुहिम की एक बड़ी जीत है। इस सफलता से गदगद होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद आगे आकर निगरानी टीम के समर्पण की जमकर तारीफ की और उन्हें ढेरों बधाई दी है।
60 का आंकड़ा और प्रोजेक्ट चीता का शानदार रिकॉर्ड
इस बड़ी कामयाबी के साथ ही भारत में चीतों का आंकड़ा 60 पर पहुंच गया है। सरकार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इन 60 में से 41 चीते ऐसे हैं, जिन्होंने भारत में ही जन्म लिया है। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रोजेक्ट चीता अपने तय लक्ष्यों से भी आगे निकल रहा है। वन विभाग के अधिकारियों की कड़ी निगरानी में मां और बच्चों को रखा गया है, ताकि इस बड़ी सफलता में कोई भी चूक न हो।
मुखी और KGP12 की सफलता को KJP21 ने दोहराया
प्रशासनिक और वन्यजीव प्रबंधन के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि KJP21 खुद एक 'मेड इन इंडिया' चीता है। वह भारतीय धरती पर बच्चों को जन्म देने वाली तीसरी मादा बन गई है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी यही सफलता दोहरा चुकी हैं। KJP21 का यह पहला सफल प्रजनन इस बात का पक्का सबूत है कि राज्य सरकार द्वारा कूनो में जो प्राकृतिक माहौल तैयार किया गया है, वह पूरी तरह से चीतों के अनुकूल है।
जानाकीर ने खोला बोत्सवाना वंशावली का राज
इस सफलता का एक और बड़ा रणनीतिक पहलू है। जानाकीर के मुताबिक, इन पांच शावकों के जन्म की सबसे खास बात इनके पिता हैं, जिन्हें बोत्सवाना से लाया गया था। इस तरह कूनो के जंगलों में आधिकारिक तौर पर पहली बार बोत्सवाना वंशावली (Botswanan lineage) की शुरुआत हो गई है, जो कूटनीतिक और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए बड़ी बात है।
जेनेटिक विविधता से मजबूत होगा प्रोजेक्ट
नीतिगत तौर पर प्रोजेक्ट चीता का सिर्फ एक लक्ष्य नहीं था कि चीते ज्यादा हों, बल्कि उनका जेनेटिक बैकग्राउंड भी मजबूत होना चाहिए। नई वंशावली के जुड़ने से भारत में विकसित हो रहे इन चीतों के जीन मजबूत होंगे, जिससे उन्हें यहां के मौसम में ढलने और बीमारियों से बचने में बहुत मदद मिलेगी।
सीएम का संदेश और मैदानी अमले का सम्मान
चीतों की वापसी के इस महा-अभियान में यह जन्म एक मील का पत्थर है। कूनो में वन विभाग की टीमें दिन-रात मुस्तैद हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया और तुरंत पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी कर्मचारियों और पूरी प्रबंधन टीम को इस जीत का श्रेय दिया। सीएम ने साफ कहा कि कूनो में गूंजी ये नई किलकारी भारत के चीता पुनर्स्थापना अभियान की दिशा में एक बहुत ही उत्साहजनक उपलब्धि है।








