बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह के घर घुसा बाढ़ का पानी, नदी किनारे निर्माण पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश में बारिश के बीच नागौद विधायक नागेंद्र सिंह का आवास जलमग्न होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नदी किनारे निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं गर्म हैं।
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में आने वाले सतना और मैहर जिले में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है कि आम जनता के साथ-साथ अब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं। नागौद से भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर विधायक नागेंद्र सिंह के आवास में बारिश का पानी भर जाने से सियासी गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारी बारिश के चलते विधायक के मकान का निचला हिस्सा पूरी तरह से जलमग्न हो गया है, जिसके चलते विधायक और उनके परिवार को अपनी दिनचर्या चलाने के लिए घर की ऊपरी मंजिल का सहारा लेना पड़ रहा है।
घरेलू सामान डूबा, प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव बढ़ा
विधायक नागेंद्र सिंह के ग्राउंड फ्लोर में कई घंटों तक पानी भरे रहने की वजह से वहां रखा फर्नीचर और दूसरा घरेलू सामान पानी में डूब गया। जलभराव की वजह से विधायक परिवार को रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि इलाके में ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति कितनी लचर है, क्योंकि विधायक के घर के अलावा आसपास के कई रिहायशी इलाके भी पानी से घिर गए हैं। हालात को देखते हुए प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है और पानी की निकासी के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
नदी तट पर बने निर्माण की वैधता पर उठने लगे सवाल
एक बड़े विधायक के आवास के डूबने के बाद अब सीधे तौर पर नदी किनारे हुए निर्माण कार्यों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है कि क्या नदी के आसपास पक्के निर्माण करने और प्राकृतिक जल प्रवाह के रास्तों को लेकर तय मानकों का सही से पालन किया गया था। कुछ जानकारों का आरोप है कि पानी के स्वाभाविक बहाव में रुकावट आने से ही ऐसी गंभीर जलभराव की स्थिति बनी है, हालांकि प्रशासन की तरफ से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है।
विधायक नागेंद्र सिंह का दो टूक जवाब: निर्माण पूरी तरह वैध
नदी किनारे घर बनाने को लेकर विपक्ष और आम जनता के बीच उठ रही उंगलियों पर खुद बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनके बंगले का निर्माण निर्धारित सरकारी नियमों के दायरे में रहकर ही किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्माण से पहले सक्षम निकाय से सभी वैधानिक अनुमतियां ली गई थीं और नियमों का शत-प्रतिशत पालन किया गया है, इसलिए निर्माण पर सवाल उठाना बिल्कुल गलत है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर, मौसम ने बढ़ाई सरकार की चिंता
सतना और मैहर जिले में जिस तरह से लगातार बादल बरस रहे हैं, उसने स्थानीय प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी निकालने और पीड़ितों को समय पर मदद पहुंचाने के लिए राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को निचले इलाकों से दूर रहने और सतर्कता बरतने को कहा है। आने वाले दिनों में अगर बारिश नहीं थमी तो हालात और ज्यादा चिंताजनक हो सकते हैं।

