बालाघाट में ₹400 करोड़ का विकास प्लान: 5 ब्लॉक में 1,500 काम, सड़क-पानी-स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस
बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण और बीमारियों से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई है।
Balaghat Development News: बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा विकास प्लान तैयार किया है। पांच विकासखंडों में करीब 1,500 विकास कार्यों पर एक साल में लगभग 400 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ पुलिया, स्टॉप डैम और सामुदायिक भवन जैसे काम शामिल हैं।
5 विकासखंडों में होंगे काम
यह योजना किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा विकासखंडों में लागू की जाएगी। इन क्षेत्रों में सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करने की तैयारी है। योजना की निगरानी मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल कर रहे हैं। वहीं जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय करेंगे। कुल 13 विभाग मिलकर इन कार्यों को जमीन पर उतारेंगे।
सड़क और सीसी रोड के लिए 269 करोड़
योजना में सबसे बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च होगा। पांचों ब्लॉक में 151 सड़क और सीसी रोड के काम किए जाएंगे। इन पर करीब 268.94 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के लिए 34.02 करोड़ रुपए और 60 स्टॉप डैम के निर्माण के लिए 35.97 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र बनेंगे
आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20 से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का निर्माण भी किया जाएगा। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की उपलब्धता बेहतर करने के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।
बच्चों की मौत वाले गांवों पर विशेष फोकस
जिले के डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। इसके बाद इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सड़क, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी PHE को
पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी PHE को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है। जहां नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं हो रहे हैं, वहां लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की योजना है।




