कुपोषण के खिलाफ सीएम मोहन यादव का बड़ा दांव, महिला समूहों के जरिए शुरू कराई नई THR राशन व्यवस्था
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मध्य प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था का विकेंद्रीकरण किया गया है। अब स्व-सहायता समूह टीएचआर तैयार करेंगे, जिससे महिलाओं का सशक्तिकरण होगा और कुपोषण पर सीधा वार होगा।
मध्य प्रदेश में कुपोषण की समस्या को जड़ से खत्म करने और सरकारी योजनाओं को सीधे आम जनता से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने मुख्यमंत्री के विजन के तहत अगस्त के पहले हफ्ते से आंगनवाड़ी केंद्रों पर नई टेक होम राशन (THR) प्रणाली शुरू कर दी है। सरकार का यह कदम न केवल बच्चों की सेहत सुधारेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकेगा।
महिला सशक्तिकरण और स्थानीय भागीदारी पर जोर
राजनीतिक और सामाजिक रूप से इस फैसले का सबसे बड़ा असर महिला स्व-सहायता समूहों पर दिखने वाला है। सरकार ने बड़े ठेकों की जगह स्थानीय महिला समूहों को टीएचआर तैयार करने का जिम्मा सौंपा है। इससे गांव की महिलाओं को सीधा रोजगार मिल रहा है और पोषण आहार की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। सरकार का मानना है कि जब मां खुद अपने इलाके के बच्चों के लिए आहार बनाएगी, तो उसमें मिलावट की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
माताओं और नन्हे बच्चों तक पहुंच रहा आहार
इस नीतिगत बदलाव के तहत 3 से 6 साल के नन्हे बच्चों को रोज आंगनवाड़ी में गरम खाना और नाश्ता खिलाया जा रहा है। वहीं 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली धात्री माताओं को हर मंगलवार गरमा-गरम खाना और अन्य दिनों में पैकेट बंद टीएचआर दिया जा रहा है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग को निरंतर पोषण मिलता रहे।
डिजिटल मॉनिटरिंग और एनआरसी से सीधा समन्वय
प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बनाते हुए सरकार ने अति गंभीर कुपोषित और कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त राशन का प्रावधान किया है। आंगनवाड़ियों में बच्चों के शारीरिक विकास की माप लेकर पोषण ट्रैकर पर लाइव डेटा अपडेट किया जा रहा है। बच्चों की स्थिति बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग और पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) की मदद तुरंत ली जा रही है, ताकि समय रहते बच्चों की जान बचाई जा सके।
जनजातीय क्षेत्रों में 681 नए केंद्रों से बदली तस्वीर
आदिवासी समाज के उत्थान की अपनी नीति पर चलते हुए सरकार ने सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष पिछड़े जनजातीय क्षेत्रों में निगरानी तंत्र मजबूत कर दिया है। केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ वनांचलों में रहने वाले गरीब परिवारों तक सीधे सरकारी राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच पक्की हो गई है।
