CM मोहन यादव की मुंबई बैठक: एमपी के लिए ₹7,500 करोड़ तक के प्रस्ताव
सीएम के साथ बैठक में ₹7,500 करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव आए। जबलपुर, गुना और धार जैसी जगहें चर्चा में रहीं।

मुंबई में उद्योगपतियों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में निवेश के मौकों पर बात की। गुरुवार को होटल द सेंट रेजिस में हुए संवाद कार्यक्रम में आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका और वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के एमडी संदीप गर्ग शामिल रहे। गोयनका ने जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन के बारे में बात की, वहीं गर्ग से पाइप, टेक्सटाइल और इन्फ्रा सेक्टर में पूंजी लगाने पर चर्चा हुई।
धार के पीएम मित्र पार्क पर टिका भिलोसा का प्रस्ताव
देश की अग्रणी टेक्सटाइल कंपनी भिलोसा इंडस्ट्रीज के एमडी संदीप जैन मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय बैठक में मिले। कंपनी ने पीएम मित्र पार्क (धार) के आसपास कई चरणों में कुल ₹7,500 करोड़ लगाने और करीब 3,750 सीधी नौकरियां देने का प्रस्ताव रखा। 300 एकड़ जमीन की प्रक्रिया आखिरी चरण में है और पहले ₹2,500 करोड़ का निवेश होगा। उत्पादन का लक्ष्य 2028 से है, जहां पॉलिएस्टर यार्न, फाइबर और फैब्रिक तैयार होंगे।
गुना को मिल सकता है देश का पहला सिलेन गैस प्लांट
आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स ने गुना में अति-उच्च शुद्धता वाले सेमीकंडक्टर-ग्रेड सिलेन गैस के देश के पहले संयंत्र के लिए ₹1,260 करोड़ का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव में उत्पादन अप्रैल 2029 से शुरू करने की बात है। कंपनी का कहना है कि इससे लगभग ₹350 करोड़ के आयात की जगह स्थानीय उत्पादन होगा और 320 से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है।
जबलपुर, रतलाम और सागर में आरपीजी की निगाह
हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर बिजली ट्रांसमिशन में काम करने की इच्छा रखी। चर्चा में प्रदेश की औद्योगिक संरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कामगार और सरकार की निवेश-हितैषी नीतियों के सहारे नई इकाइयां खोलने की संभावनाएं टटोली गईं।
मध्यप्रदेश की केंद्रीय स्थिति और कच्चे माल की मौजूदगी देखकर आरपीजी ने टायर फैक्ट्री का विचार भी रखा। रतलाम, सागर और जबलपुर इसके संभावित ठिकानों के रूप में आए। वहां की औद्योगिक सुविधाओं और दूसरी जरूरतों का आकलन होने के बाद आगे की बात हो सकती है।
उज्जैन में आईटी निवेश पर सकारात्मक बात
आईटी में निवेश को लेकर भी बातचीत सकारात्मक रही। आरपीजी की टीम संभावित जगहों का दौरा कर सुविधाओं और बिजनेस संभावनाओं को आंकना चाहती है। उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में मौजूद प्लग-एंड-प्ले सुविधा के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई, जिससे समूह तैयार ढांचे पर अपना आईटी काम शुरू कर सकता है।
संभावित परियोजनाओं के लिए उपयुक्त जमीन, जरूरी अनुमतियां, प्रोत्साहन और एकल-खिड़की के जरिए सहयोग पर भी बात हुई। प्राथमिकता वाले प्रस्तावों और जगहों की पहचान कर आगे का रास्ता आसान करने पर जोर दिया गया।
आरपीजी का एमपी से सात दशक से ज्यादा पुराना रिश्ता
आरपीजी देश का एक बड़ा औद्योगिक समूह है। इसका काम इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी, टायर, आईटी, फार्मा, ऊर्जा समाधान और उभरती तकनीकों तक फैला है। केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज इसके प्रमुख कारोबार हैं और इसकी मौजूदगी छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में है।
साल 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के जरिए समूह मध्यप्रदेश में रहा है। इसकी प्रमुख कंपनी केईसी इंटरनेशनल ने नीमच अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली सहित राज्य के बिजली ट्रांसमिशन ढांचे के विकास में हाथ बंटाया है।
वेलस्पन को चाहिए मिल की जमीन पर टेक्सटाइल पार्क
संदीप गर्ग के साथ चर्चा में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पाइप बनाने, टेक्निकल टेक्सटाइल और बुनियादी ढांचे में वेलस्पन की निवेश योजनाओं और नई परियोजनाओं में साझेदारी पर बात की।
वेलस्पन ने मिल की जमीन पर बनने वाले टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में निवेश की रुचि बताई और उसमें एंकर यूनिट लगाने की इच्छा जताई। जगह का मुआयना करने के लिए समूह अपनी टीम भेजेगा।
वेलस्पन कॉर्प के ₹150 करोड़
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और संदीप गर्ग के बीच वेलस्पन कॉर्प के एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ लगाने पर बात हुई। प्रदेश में पाइप निर्माण को लेकर समूह की गतिविधियों और योजनाओं पर भी चर्चा रही।
सिंटेक्स के ₹700 करोड़ पर भी हुई बात
सिंटेक्स का ₹700 करोड़ का निवेश अभी चल रहा है और बैठक में उसका जिक्र आया। रायसेन और देवास में समूह की मौजूदगी के हवाले से पाइप और टेक्सटाइल क्षेत्र की गतिविधियों पर संवाद हुआ।
सड़क और जल परियोजनाओं में वेलस्पन की एंट्री
वेलस्पन प्रदेश की सड़क-हाईवे समेत अन्य इन्फ्रा परियोजनाओं से भी जुड़ेगा। इस पर बैठक में निवेश और भागीदारी की चर्चा हुई। जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन के प्रोजेक्ट्स में उसकी हिस्सेदारी की संभावना पर भी बात हुई।
समूह इन्फ्रास्ट्रक्चर, पाइप और टेक्सटाइल सहित कई क्षेत्रों में है। वह सड़क-राजमार्ग और जल-अपशिष्ट जल प्रबंधन की परियोजनाएं विकसित भी करता है और चलाता भी है। निर्माण में एमएस और पीवीसी पाइप, फिटिंग्स, वाटर टैंक और होम टेक्सटाइल्स आते हैं। रायसेन और देवास में उसकी मौजूदगी है।












