नरसिंहपुर के सरकारी अस्पताल की बदहाल तस्वीर! नर्स और वार्डबॉय के भरोसे इलाज, डॉक्टर नदारद
नरसिंहपुर के आमगांव बड़ा सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है।
Narsinghpur News: नरसिंहपुर के आमगांव बड़ा सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी से मरीज परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ओपीडी समय के दौरान भी कई बार डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते। अस्पताल में खाली कुर्सियां और सन्नाटा यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। डॉक्टर न होने से छोटे-मोटे इलाज के लिए भी मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
नर्स और वार्डबॉय के भरोसे अस्पताल
ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर के अलावा लैब टेक्नीशियन और ड्रेसर जैसे जरूरी कर्मचारी भी नहीं हैं। दो नर्स और एक वार्डबॉय के भरोसे ही अस्पताल की व्यवस्थाएं चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभारी डॉक्टर हफ्ते में कुछ दिन ही आते हैं। ऐसे में दूर के गांवों से इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को निराश लौटना पड़ता है।
40 गांवों के मरीजों के लिए अहम अस्पताल
नरसिंहपुर जिले का आमगांव बड़ा सरकारी अस्पताल आसपास के करीब 40 गांवों के लोगों के लिए इलाज का प्रमुख केंद्र है। रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सुबह करीब 10 बजे तक डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में मरीजों को इंतजार करना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं
अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने से गंभीर मरीजों की मुश्किल और बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों को दूसरे अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।
वहीं गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर करेली या लगभग 25 किलोमीटर दूर नरसिंहपुर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ मिल जाए, तो मरीजों की निजी अस्पतालों में जाने की मजबूरी खत्म हो सकती है।
'कई बार डॉक्टर नहीं मिलते'
स्थानीय नागरिक सोमेश पटेल ने बताया कि वह अपनी मां का इलाज कराने आमगांव बड़ा अस्पताल आते हैं। उनके मुताबिक कई बार अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। ड्यूटी पर मौजूद नर्स छोटे-मोटे इलाज और दवाइयां उपलब्ध करा देती हैं, लेकिन गंभीर बीमारी या विशेष उपचार के लिए डॉक्टर का होना जरूरी है।
चार साल से उठ रही डॉक्टरों की मांग
जिला पंचायत सदस्य सीताराम नामदेव ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ की मांग पिछले करीब चार साल से की जा रही है। उनका कहना है कि आमगांव बड़ा अस्पताल करीब 40 गांवों के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मांग की कि अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और जरूरी स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति जल्द की जाए, ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े।
BMO ने मानी डॉक्टर-स्टाफ की कमी
मामले में BMO डॉ. विनय ठाकुर ने अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि आमगांव बड़ा में दो डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन अतिरिक्त प्रभार के कारण उन्हें दूसरे स्थानों पर भी सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
BMO के मुताबिक अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता को लेकर मांग भेजी जा चुकी है। अब देखना होगा कि डॉक्टर और अन्य जरूरी कर्मचारियों की कमी कब तक दूर होती है।








