नरसिंहपुर में मध्यान्ह भोजन के बाद 45 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती; 2 दिन पुराने आटे से खाना बनाने का आरोप
नरसिंहपुर के समनापुर स्थित सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन में खीर-पूरी खाने के बाद 45 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी और पेट दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया

Narsinghpur News: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में सरकारी स्कूल के मध्यान्ह भोजन को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। समनापुर की शासकीय माध्यमिक शाला में खीर-पूरी खाने के बाद 45 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी और पेट दर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि भोजन बनाने वाले स्वसहायता समूह ने गांव के एक कार्यक्रम से लाया गया दो दिन पुराना गूंथा हुआ आटा पूरियां बनाने में इस्तेमाल किया था। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर और एसपी अस्पताल पहुंचे।
पूरियां खाते ही बच्चों को होने लगी उल्टी
मामला नरसिंहपुर विकासखंड के समनापुर (चीलाचोन) स्थित शासकीय माध्यमिक शाला का है। यहां मध्यान्ह भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी एकता स्वसहायता समूह के पास थी। बुधवार को बच्चों को खीर-पूरी परोसी गई।
जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 1:30 बजे बच्चों ने खाना शुरू किया। कुछ बच्चों ने पूरियों के स्वाद और गंध को लेकर शिकायत की। इसके बाद प्रधान पाठक गणेशदत्त बादल ने भी भोजन चखा। बताया गया कि पूरियों में खटास और खराब गंध महसूस हो रही थी।
कुछ ही देर में बच्चों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत होने लगी। आरोप है कि पूरियां बनाने के लिए गांव के एक कार्यक्रम से लाया गया दो दिन पुराना गूंथा हुआ आटा इस्तेमाल किया गया था।
प्रधान पाठक ने अधिकारियों को दी सूचना
बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर प्रधान पाठक ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद उपलब्ध वाहनों और एंबुलेंस की मदद से बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। बताया गया कि प्रधान पाठक ने भोजन की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई थी, लेकिन समूह के सदस्यों ने शुरुआत में गलती स्वीकार नहीं की। घटना के बाद स्कूल और प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच गई।
कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा
घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर रजनी सिंह और एसपी डॉ. ऋषिकेश मीना जिला अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। चिकित्सकों के अनुसार, सभी बच्चों की हालत सामान्य है और वे खतरे से बाहर हैं। एहतियात के तौर पर कुल 45 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा गया है। इनमें प्राथमिक शाला के 8 और माध्यमिक शाला के 37 बच्चे शामिल हैं।
स्वसहायता समूह को हटाया, जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रजनी सिंह ने मध्यान्ह भोजन बनाने वाले एकता स्वसहायता समूह को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। साथ ही घटना की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल भोजन में इस्तेमाल किए गए आटे और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारणों की जांच की जानी है।
मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए मध्यान्ह भोजन योजना चलाई जाती है। ऐसे में समनापुर की घटना ने भोजन की गुणवत्ता और उसकी तैयारी की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी 45 बच्चों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।



