Balaghat Jal Satyagraha : बालाघाट में जल सत्याग्रह, टूटे पुल के लिए युवाओं का प्रदर्शन
Balaghat Jal Satyagraha : जल सत्याग्रह की जानकारी मिलने के बाद आरईएस अधिकारी इक्का मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनका ज्ञापन लिया।
Balaghat Jal Satyagraha : बालाघाट। हट्टा क्षेत्र के गढ़दा के पंवारीटोला में टूटी पुलिया से परेशान ग्रामीणों और स्कूली छात्राओं ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया। बब्बर सेना के प्रतिनिधि हितेश माहुले के नेतृत्व में युवाओं और ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने टूटी पुलिया के पास पानी में खड़े होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया खराब होने से बारिश के दौरान आवागमन में काफी परेशानी होती है।
पानी में खड़े होकर जताया विरोध
ग्रामीणों ने टूटी पुलिया के पानी में खड़े होकर प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि पुलिया की हालत लंबे समय से खराब है। बारिश में पानी बढ़ने पर रास्ते से निकलना मुश्किल हो जाता है।
इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली छात्राओं और रोजाना आने-जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की।
मौके पर पहुंचे आरईएस अधिकारी
जल सत्याग्रह की जानकारी मिलने के बाद आरईएस अधिकारी इक्का मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनका ज्ञापन लिया। अधिकारी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर पंवारीटोला और गढ़दा से बुढेना के बीच की पुलिया पर वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। इससे बारिश के दौरान ग्रामीणों का आवागमन सुचारु रखने में मदद मिलेगी।
एस्टीमेट तैयार, तकनीकी स्वीकृति का इंतजार
आरईएस अधिकारी इक्का ने ग्रामीणों की मांग को जायज बताया। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्ग और पुलिया से संबंधित एस्टीमेट तैयार है। अब तकनीकी स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाएगा।
प्रशासन के सामने भी ग्रामीणों की समस्या रखी जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद फिलहाल ग्रामीणों ने आंदोलन पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
10 दिन में रास्ता नहीं बना तो आंदोलन
जल सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे हितेश माहुले ने कहा कि प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 10 दिन का समय दिया है।
उन्होंने कहा कि अगर इस अवधि में वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया, तो ग्रामीण और युवा दोबारा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने पुलिया की समस्या का स्थायी समाधान होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
चार साल से टूटी है पंवारीटोला की पुलिया
ग्रामीणों के अनुसार पंवारीटोला की पुलिया पिछले चार साल से टूटी हुई है। बरसात के मौसम में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को कई बार करीब 5 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है।
इससे स्कूल जाने वाले बच्चों और दैनिक काम के लिए निकलने वाले लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो बारिश के दौरान मुश्किल और बढ़ सकती है।
गढ़दा-बुढेना के बीच भी पुलिया की मांग
ग्रामीणों के मुताबिक गढ़दा से बुढेना के बीच आजादी के बाद से अब तक पुलिया का निर्माण नहीं हुआ है। इस कारण बारिश के मौसम में आवागमन प्रभावित होता है। बब्बर सेना और ग्रामीणों ने अब इस समस्या को लेकर आंदोलन शुरू किया है।
गुरुवार को हुए जल सत्याग्रह को इसी अभियान की शुरुआत बताया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि वैकल्पिक मार्ग के साथ स्थायी पुलिया का निर्माण भी जल्द कराया जाए।
