MP News: ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जीवाड़ा; फर्जी मार्कशीट से ली नौकरी, 8 अभ्यर्थी बर्खास्त
जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक के पद पर चयन के लिए आठ अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी मार्कशीट और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया है।

GDS Bharti Fraud: फर्जी मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले जालसाजों के खिलाफ CBI ने बड़ा शिकंजा कसा है। जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS भर्ती में फर्जी 10वीं की अंकसूची लगाकर नौकरी पाने वाले 8 आरोपियों के खिलाफ CBI ने FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में आरोपियों से जुड़े 8 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी कर फर्जीवाड़े से जुड़े कई बेहद संवेदनशील दस्तावेज और महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं। इसके साथ ही CBI को इस पूरे खेल में 30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियों की जानकारी मिली है और विभागीय एवं शैक्षणिक तंत्र से जुड़े संभावित भ्रष्ट लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाए नंबर
आरोपियों ने फर्जी प्रमाण-पत्रों में अपने नंबर बेहद बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाए थे। चूंकि GDS पद पर चयन 10वीं के अंकों की मेरिट के आधार पर होता है, इसलिए ज्यादा नंबरों के दम पर इन्होंने आसानी से नौकरी हासिल कर ली। शुरुआती स्व-सत्यापित दस्तावेज जमा करने के बाद इन्हें अस्थाई नियुक्तियां भी दे दी गईं और इन्होंने वेतन एवं भत्ते उठाना भी शुरू कर दिया।
अलग-अलग उपडाकघरों में पदस्थापना
जानकारी के अनुसार ग्रामीण डाक सेवक नियोजन साइकिल जनवरी 2024 और जुलाई 2024 के दौरान अभ्यर्थियों ने विभाग के पोर्टल पर दसवीं की सेल्फ अटेस्टेड अंकसूची अपलोड की थी। इसी दस्तावेज के आधार पर उनका चयन हुआ और बाद में अलग-अलग उपडाकघरों में पदस्थापना दी गई।
8 अभ्यर्थी बर्खास्त
जब डाक विभाग ने विभिन्न शिक्षा बोर्ड से अंकसूचियों का सत्यापन कराया तो सभी आठ दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद अभ्यर्थियों को नौकरी से निष्कासित कर दिया गया।
सीबीआई में की शिकायत
डाकघर सब डिवीजन क्रमांक-1 के असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट लवकुश पारेते ने 18 सितंबर 2026 को सीबीआई में शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 22 सितंबर को आठ अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले की विवेचना जारी है।
इन लोगों पर गिरी गाज
सीबीआई ने इस मामले में मानवेन्द्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। सभी आरोपियों पर BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। फिलहाल इस पूरे फर्जीवाड़ा सिंडिकेट को बेनकाब करने और इसमें शामिल अन्य मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने के लिए सीबीआई की जांच जारी है।



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