CM Dhami in Chamoli: पीपलकोटी टनल हादसे में 7 की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल, सीएम ने खुद संभाला मोर्चा
चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे ने पहाड़ों में विकास कार्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 मजदूरों की मौत के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खुद मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
उत्तराखंड में ढांचागत विकास और पहाड़ों की संवेदनशीलता के बीच जो खिंचतान चल रही है, उसका एक और दुखद नतीजा चमोली के पीपलकोटी में सामने आया. जलविद्युत परियोजना के तहत चल रही टनल में पानी और मलबा घुस जाने से हुआ हादसा, और उसमें 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत, ने सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवालों को हवा दे दी है. इस बड़ी प्रशासनिक, राजनीतिक उलझन के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत ही 14 अगस्त को खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया. उनका वहां पहुंचना जाहिर करता है कि राज्य सरकार इस त्रासदी को कितनी गंभीरता से ले रही है, या यूं कहें तो—राजनीतिक तौर पर भी संदेश साफ है.
सीएम धामी का कड़ा रुख : “हर श्रमिक की जान हमारी प्राथमिकता”
घटनास्थल (पीपलकोटी) पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने खुद टनल के अंदर जाकर हालात को देखा और समझा. उन्होंने बचाव अभियान में लगे NDRF, SDRF, सेना और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों से सीधे संवाद किया, और सख्त निर्देश भी दिए. सीएम धामी ने कहा कि “टनल में फंसे हर मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.” फिर वे मानवीय पक्ष को साथ रखते हुए गोपेश्वर के जिला अस्पताल भी पहुंचे, जहां घायल श्रमिकों से मिलकर उनका हाल जाना.
15 घंटे का संघर्ष, और 3 जिंदगियों की तलाश
प्रशासनिक स्तर पर इस घटना से निपटने के लिए समन्वय असामान्य स्तर का दिख रहा है. गुरुवार 13 अगस्त की शाम 7 बजे हादसा हुआ था, और उसके 15 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. सुरंग के अंदर अभी भी 3 मजदूरों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है. लगातार भारी पानी और मलबे के रिसाव की वजह से बचाव टीमों को लगातार जटिल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन का कहना है कि टीमें एहतियात के साथ मलबा हटाते हुए आगे की तरफ बढ़ रही हैं.
केंद्र सरकार का मिला सहारा
इस राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव वाली घड़ी में केंद्र सरकार ने भी राज्य को हरसंभव मदद देने का भरोसा दिया है. राहत कार्य में NDRF, SDRF के अलावा ITBP, सेना, पुलिस और फायर सर्विस की संयुक्त टीमें लगाई गई हैं. साथ ही अतिरिक्त संसाधन गौचर और जोशीमठ से भी मंगवाए गए हैं. जिला प्रशासन की टीम पूरे रेस्क्यू अभियान की पल-पल मॉनिटरिंग कर रही है, ताकि कोई भी चूक न हो.
14 घायलों का इलाज, 1 की स्थिति बेहद गंभीर
सरकार की ओर से घायलों के उपचार में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है. अभी तक निकाले गए 14 सुरक्षित मजदूरों में से 13 का इलाज गोपेश्वर जिला अस्पताल में चल रहा है. वहीं, एक मजदूर की हालत को देखते हुए उसे तुरंत श्रीनगर के हायर सेंटर भेजा गया. अस्पताल प्रशासन को हादसे के तुरंत बाद ही अलर्ट कर दिया गया था, जिससे समय रहते उपचार शुरू हो सके.
मजदूरों की मौत: दूसरे राज्यों तक पहुंचा शोक
यह हादसा उत्तराखंड के दायरे में ही नहीं रुका, बल्कि इसके बाद दूसरे राज्यों में भी शोक की लहर फैल गई. जान गंवाने वाले 7 मजदूरों में प्रदीप सिंह पंवार (टिहरी) और मुकेश उर्गम (चमोली) के साथ-साथ विजय और जितेंद्र कुमार (झारखंड) तथा दुर्लभ शर्मा (बिहार) के रहने वाले थे. इसके अलावा लोकेश्वर और भुवनेश्वर की भी मौत की खबर है। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा नीतियों पर एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है.
