मध्य प्रदेश में बिछेगा उद्योगों का जाल, ग्लोबल इवेंट में सीएम डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को लुभाने के लिए पेश की नई रणनीति
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के करीब 30 लाख करोड़ वाले प्रस्तावों में , 30% से कुछ ज्यादा यानी जमीन पर उतरने की बात मुख्यमंत्री ने कही थी, और ये भी बताया कि आगे का रुख तेज रहेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के सोया कॉन्क्लेव में कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में प्रदेश को करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। उनके अनुसार इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक धरातल पर उतारे जा चुके हैं। वे शुक्रवार (16 अक्टूबर) को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।
प्रस्तावों को असली परियोजना बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलें और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर बनें। राज्य सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रही है। निवेशकों के साथ संवाद लगातार चल रहा है और उद्योगों के विस्तार के लिए विभिन्न कार्यक्रम हो रहे हैं।
नया कॉरिडोर और सस्ती बिजली-जमीन-पानी
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को जोड़कर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए गुरुवार (15 अक्टूबर) को कैबिनेट विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) को मंजूरी दे चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में सस्ती बिजली, जमीन और पानी निवेशकों को आकर्षित करते हैं। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से इलाकों के संसाधन और औद्योगिक संभावनाएं सामने आई हैं। सरकार का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना है। युवाओं के रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर प्रयास हो रहे हैं, और सोयाबीन व खाद्य तेल उद्योग इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मालवा सोयाबीन की राजधानी, देश का 45% उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है। उन्होंने मालवा को सोयाबीन की राजधानी बताया और सोया प्रोसेसिंग, खाद्य तेल उद्योग और कृषि आधारित निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को फूड बास्केट के रूप में पहचान मिली है, और खराब मौसम तथा अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में बड़ा योगदान दिया। सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की उत्पादकता सुधारने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए जुटी है। सोयाबीन किसानों की आमदनी, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण से भी जुड़ा है।
प्रोसेसिंग से आत्मनिर्भरता तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में विकास की संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और उत्पादों में विविधता से यह क्षेत्र मजबूत हो सकता है। खाद्य तेल उद्योग के विस्तार से भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है, और प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत के साथ भंडारण, विपणन और मूल्य संवर्धन के मौके मिलेंगे।
सोपा चेयरमैन की बात और सम्मान समारोह
सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में फैसले ले रही है। उन्होंने भावांतर योजना का उल्लेख किया, जिसमें किसानों को उपज की कीमत में अंतर की राशि दी जाती है। उन्होंने सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन की जरूरत पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में काम करने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया, और गोयनका ने उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट किया।
कौन-कौन शामिल हुआ
कॉन्क्लेव की थीम 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' है और यह 16-17 अक्टूबर को चल रहा है। इसका मकसद खाद्य तेल और सोयाबीन क्षेत्र की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है। देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उद्योगपति, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए। मंच पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल सहित उद्योग और खेती-व्यापार जगत के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।




