बच्चों के बीच पहुंचे CM मोहन, मंडला में सादगी से दिया बड़ा सियासी संदेश
CM मोहन यादव ने मंडला के टाटरी में स्कूल पहुंचकर अपनी सादगी का संदेश दिया। इस अचानक दौरे से राजनीतिक हलकों में भी काफी चर्चा है।

12 अक्टूबर 2026 को मंडला जिले के टाटरी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ ऐसा ही कर दिया, जब उन्होंने अपना वीआईपी दस्ता एक निजी पब्लिक स्कूल के बाहर रोक दिया। ये कदम आम लोगों, और खासकर नई नस्ल से सीधे तौर पर जुड़ने वाली एक बड़ी राजनीतिक कोशिश मानी जा रही है, हां थोड़ा सा अलग अंदाज।
बिना तय प्रोग्राम के रोका वीआईपी दस्तां
सोमवार को जब शासन प्रमुख टाटरी हेलीपैड की तरफ निकले थे, तो उनका शेड्यूल कहीं भी साफ-साफ तय नहीं था। पर रास्ते में अचानक एक प्रार्थना सभा दिखी, और बस फिर क्या था उन्होंने अपनी फ्लीट रोक ली। इस तरह का जनसंपर्क नेताओं की जड़ें, ज़मीनी पकड़ को और मजबूत कर देता है, ऐसा सियासत के जानकार बताते हैं।
शिक्षा, संस्कारों को ज्यादा तवज्जो
सूबे के मुखिया जब बिना किसी ताम-झाम, विद्या मंदिर के प्रांगण में पहुंच गए तो वहां मौजूद शिक्षक और विद्यार्थी सच में हैरान रह गए। बच्चे उस समय परमपिता परमेश्वर की आराधना में लीन थे। सीएम ने उनके बीच ही ये संकेत वाला संदेश दे दिया कि सरकार शिक्षा और संस्कारों को सच में कितनी अहमियत देती है।
भविष्य के वोटरों से सीधा संवाद
उन्होंने छात्र-छात्राओं से भी बड़ी सहजता से बात की। बालकों से पूछा, आपकी पढ़ाई कैसी चल रही है, साथ ही उनका नाम और क्लास की भी जानकारी ली। एक बड़े नेता का ये दोस्ताना मिज़ाज भविष्य के वोटर्स, यानी आज के छात्रों के मन में एक सकारात्मक छवि छोड़ देता है।
जन-केंद्रित फैसलों का असर
इसके बाद डॉ. मोहन यादव ने सब नौनिहालों को दिल से मन लगाकर पढ़ने की प्रेरणा दी। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि टाटरी जैसे इलाके में इस तरह की औचक मुलाकातें सिर्फ एक घटना नहीं होती, बल्कि सरकार की जन केंद्रित नीतियों का साफ प्रतिबिंब साबित होती हैं।










