शाजापुर में कृष्णमृग और नीलगाय रेस्क्यू अभियान: CM मोहन यादव ने हेलीकॉप्टर से लिया जायजा, 2000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर के रंथभंवर में कृष्णमृग और नीलगाय रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। अब तक 1,236 से अधिक वन्यजीवों का रेस्क्यू हो चुका है। अभियान के तहत 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का लक्ष्य है।

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने और वन्यजीवों को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए चल रहे कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण किया। उन्होंने रंथभंवर पहुंचकर हेलीकॉप्टर से अभियान की व्यवस्थाओं और प्रगति का जायजा लिया। इस अभियान के तहत 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। रेस्क्यू के दौरान इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि जानवरों को चोट न पहुंचे और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
अब तक 1,236 से ज्यादा वन्यजीवों का रेस्क्यू
मुख्यमंत्री ने बताया कि शाजापुर जिले में अब तक 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इन्हें श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
वन्यजीवों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। परिवहन के दौरान पशु चिकित्सकों, जरूरी उपकरणों और अन्य सुविधाओं का इंतजाम भी किया गया है, ताकि जानवरों की सेहत पर नजर रखी जा सके।
किसानों की फसल बचाने के लिए शुरू हुई पहल
शाजापुर जिले में कृष्णमृग और नीलगायों की वजह से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या को देखते हुए पिछले साल यह अभियान शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें ऐसे सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है, जहां उनके रहने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो। इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम की मदद ली जा रही है। वन विभाग बोमा पद्धति के जरिए जानवरों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित स्थानों तक पहुंचा रहा है। बोमा पद्धति में वन्यजीवों को विशेष रूप से तैयार किए गए रास्तों और घेरे की मदद से सुरक्षित तरीके से एक स्थान पर लाया जाता है। इसके बाद उन्हें सावधानीपूर्वक पकड़कर परिवहन के जरिए दूसरे सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में जानवरों को चोट से बचाने और तनाव कम रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
CM ने अधिकारियों से ली व्यवस्थाओं की जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के माध्यम से किए जा रहे कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री ने रंथभंवर में कैमोफ्लाज्ड मचान से चलाए जा रहे रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण किया और वन विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली।
दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान को दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से वन्यजीवों का संरक्षण करने के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के काम की सराहना की। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस परियोजना की सफलता से दूसरे राज्यों को भी वन्यजीव संरक्षण और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ऐसी पहल करने की प्रेरणा मिलेगी।
31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
शाजापुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की प्रगति के आधार पर वन्यजीवों को निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों तक पहुंचाने का काम जारी है।
निरीक्षण के दौरान शाजापुर विधायक अरुण भीमावद, कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, उज्जैन संभाग के प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।







