जबलपुर में दिवाली पर सिर्फ 2 घंटे ही फोड़ सकेंगे पटाखे, रात 8 से 10 बजे तक ही अनुमति
जबलपुर में दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात 8 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है। 125 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखों पर प्रतिबंध है।


Jabalpur Diwali Firecracker Rules: जबलपुर में दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए हैं। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के आदेश के मुताबिक, लोग रात 8 बजे से 10 बजे तक ही आतिशबाजी कर सकेंगे। इसके अलावा 125 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखों पर रोक रहेगी। अस्पतालों, नर्सिंग होम, न्यायालय और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में भी पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
तेज आवाज वाले पटाखों पर प्रतिबंध
प्रशासन ने ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पटाखों के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। तय समय से पहले या रात 10 बजे के बाद पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
आदेश के अनुसार, 125 डेसिबल से अधिक ध्वनि वाले पटाखों और पटाखों की लड़ियों पर भी प्रतिबंध है। प्रशासन ने पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। प्रतिबंधित रसायनों से बने पटाखों की खरीद-बिक्री, भंडारण और परिवहन पर भी रोक लगाई गई है।
इन जगहों के पास नहीं चला सकेंगे पटाखे
जबलपुर प्रशासन ने शांत क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों के आसपास आतिशबाजी पर रोक लगाई है। इसके तहत अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षण संस्थान, न्यायालय और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं चलाए जा सकेंगे। इसके अलावा पेट्रोल पंप, गैस गोदाम और अन्य ज्वलनशील स्थानों के आसपास भी आतिशबाजी की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा के साथ ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
नकली ग्रीन पटाखों पर कार्रवाई की मांग
नागरिक उपभोक्ता एवं मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने प्रशासन को ज्ञापन देकर नकली ग्रीन पटाखों और तेज आवाज वाले पटाखों की बिक्री पर चिंता जताई थी। मंच ने मांग की थी कि ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जा रहे ऐसे उत्पादों पर रोक लगाई जाए और सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों का पालन कराया जाए। मंच की मांग है कि बाजार में बिकने वाले पटाखों की जांच हो, ताकि पर्यावरण के अनुकूल पटाखों के नाम पर नियमों का उल्लंघन न हो।
दिवाली पर नियमों का पालन जरूरी
दिवाली के दौरान देर रात तक पटाखे चलाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। प्रशासन ने इसी को ध्यान में रखते हुए आतिशबाजी का समय और पटाखों के प्रकार तय किए हैं। लोगों से अपील है कि पटाखे चलाते समय निर्धारित समय और प्रतिबंधित क्षेत्रों से जुड़े नियमों का पालन करें।

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