इंजीनियर डे पर CM मोहन यादव का बड़ा संदेश, प्राचीन विरासत और आधुनिक विकास को जोड़ने का दिया विजन
इंजीनियर डे के मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विजन पेश किया है। उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संतुलन और प्राचीन विरासत को सहेजने पर जोर दिया है।
मध्य प्रदेश की सत्ता की कमान संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य के विकास को एक नई दिशा देने में जुटे हैं। आज देश भर में मनाए जा रहे इंजीनियर डे के मौके पर उन्होंने प्रदेश के सभी इंजीनियर्स को शुभकामनाएं देकर एक बड़ा संदेश दिया। सीएम ने महान इंजीनियर और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के योगदान को नमन किया। उन्होंने सियासी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में कहा कि देश के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका सिर्फ मशीनी या तकनीकी काम तक सीमित नहीं होती। दरअसल, लोक निर्माण से लेकर आम जनता के कल्याण तक, एक अभियंता ही समाज की दशा और दिशा तय करने में सबसे बड़ा योगदान देता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वेश्वरैया के काम करने के तरीके को आदर्श बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा से देश के अभियंताओं को समाज में एक नई पहचान दिलाई थी। उनके योगदान से वर्तमान नेतृत्व को भी यह संदेश मिलता है कि किसी भी तकनीकी ज्ञान का सीधा फायदा समाज और राष्ट्र के विकास को मिलना चाहिए। इसी राजनीतिक विजन के साथ सीएम ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अभियंताओं से यह अपील की कि वे आज की आधुनिक तकनीक और अपनी जन-जिम्मेदारी के बीच एक बेहतरीन तालमेल बनाकर काम करें।
भारत के प्राचीन स्थापत्य का राजनीतिक व सामाजिक महत्व
अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने की नीति के तहत सीएम मोहन यादव ने भारत की प्राचीन स्थापत्य परंपरा और निर्माण तकनीक का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की ऐतिहासिक विरासत इस बात का सबसे पुख्ता प्रमाण है कि भारत में कई सदियों पहले भी इंजीनियरिंग का स्तर बहुत ऊंचा था। उन्होंने कहा कि चट्टानों को काटकर बनाए गए भव्य मंदिर, हमारी पुरानी जल संरचनाएं और विशाल स्थापत्य आज भी दुनिया भर के लोगों को अचरज में डाल देते हैं।
अपनी बात को स्थानीय गौरव से जोड़ते हुए उन्होंने मंदसौर और विदिशा के प्राचीन मंदिरों की बेमिसाल स्थापत्य कला का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन ऐतिहासिक निर्माणों में उस समय के शासकों और वास्तुकारों की तकनीकी समझ, मजबूत योजना और गहरी दूरदृष्टि नजर आती है। उनके मुताबिक, प्राचीन भारत में तैयार की गई ये तमाम संरचनाएं आज के हमारे इंजीनियरों और नीति निर्माताओं के लिए भी एक बहुत बड़े प्रेरणा स्रोत का काम करती हैं।
पर्यावरण और विकास की नीतियों पर फोकस
सरकार की पर्यावरण नीतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में निर्माण कार्यों की रफ्तार काफी तेज हुई है, लेकिन हमें विकास के अंधानुकरण के बजाय पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी नीतियों में प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने साफ किया कि हमारी जल संरचनाओं, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखकर ही कोई भी नई परियोजना तैयार की जानी चाहिए। इसी नजरिए से उन्होंने जीवनदायिनी नर्मदा और प्रदेश की दूसरी नदियों के संरक्षण पर भी सबसे ज्यादा जोर दिया।
राजा भोज और विक्रमादित्य के सुशासन का हवाला
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सुशासन की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के गौरवमयी इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने राजा भोज और सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में हुए बेहतरीन निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं की मिसाल दी। सीएम ने कहा कि उस दौर की योजनाओं में जनहित को सर्वोपरि रखने, बेहतरीन जल प्रबंधन और सुव्यवस्थित निर्माण की स्पष्ट सोच झलकती है। उन्होंने कहा कि आज हमें अपनी इस प्राचीन विरासत को आधुनिक तकनीक और वर्तमान समय की जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ने की सख्त आवश्यकता है, क्योंकि ऐतिहासिक ज्ञान और आधुनिक इंजीनियरिंग का यह तालमेल ही भविष्य के विकास को स्थायी और टिकाऊ बना सकता है।
अपने विजन को जमीन पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी अभियंताओं से पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी सरकारी और सामाजिक जिम्मेदारियां निभाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत को दुनिया में एक नई और बड़ी ऊंचाई तक ले जाने के लिए हमारे तकनीकी विशेषज्ञों, तमाम इंजीनियरों और युवा शक्ति को अपनी पूरी क्षमता झोंक कर काम करना होगा। अभियंता दिवस के इस मौके पर उन्होंने प्रदेश के सभी अभियंताओं को अपनी शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में उनके इस शानदार योगदान की खुले मन से सराहना की।






