कटनी में 'स्वामित्व योजना' पर पटवारियों का विरोध, 15 सितंबर से कार्य बहिष्कार, जानें पूरी खबर
कटनी जिला पटवारी संघ ने स्वामित्व योजना के निष्पादन कार्य से 15 सितंबर से दूर रहने का ऐलान किया है।
Katni News: मध्यप्रदेश के कटनी में स्वामित्व योजना को लेकर पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। जिला पटवारी संघ ने 15 सितंबर से स्वामित्व योजना के निष्पादन कार्य से दूर रहने का ऐलान किया है। मंगलवार को संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। पटवारियों का कहना है कि वे ग्रामीणों को स्वामित्व अधिकार देने वाली योजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन निष्पादन, e-KYC और पंजीयन जैसी जिम्मेदारियां पटवारियों को सौंपे जाने पर आपत्ति है।
किस बात का विरोध कर रहे हैं पटवारी?
पटवारी संघ के मुताबिक ग्रामीण आबादी क्षेत्र का सर्वे और मैपिंग पंचायत राज व्यवस्था के तहत किया गया है। पटवारियों ने अब तक इसमें मैदानी स्तर पर सहयोग और रिकॉर्ड संबंधी काम किया है।
संघ का कहना है कि अब उन्हें दस्तावेज का निष्पादक बनाकर e-signature कराने की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसी जिम्मेदारी को लेकर पटवारियों ने सवाल उठाए हैं।
पुराने रिकॉर्ड की गलती पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी का डर
पटवारियों की सबसे बड़ी चिंता दस्तावेज में उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही को लेकर है। पटवारी संघ के अनुसार पंजीयन दस्तावेज में पटवारी का नाम, पद और e-signature दर्ज रहेगा।
भविष्य में अगर जमीन की सीमा, क्षेत्रफल, नाम या वारिसों से जुड़ी कोई पुरानी गलती सामने आती है तो पटवारी को व्यक्तिगत कानूनी विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
संघ का तर्क है कि पटवारी न जमीन का मालिक है और न ही हस्तांतरणकर्ता, इसलिए उसे दस्तावेज का निष्पादक बनाना उचित नहीं है।
पंजीयन की शक्तियां पंचायत विभाग को देने की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि आबादी क्षेत्र में पट्टा वितरण और रिकॉर्ड के रखरखाव का काम पहले से जनपद और ग्राम पंचायतों के स्तर पर होता रहा है।
इसलिए निष्पादन और पंजीयन की शक्तियां पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दी जाएं। योजना में हुई तकनीकी और लिपिकीय गलतियों को सुधारने का अवसर देने की मांग भी की गई है।
दबाव बनाने पर हड़ताल की चेतावनी
संघ ने साफ कहा है कि 15 सितंबर से पटवारी स्वामित्व योजना के निष्पादन कार्य से दूर रहेंगे। यदि प्रशासन की ओर से दबाव बनाया गया या दंडात्मक कार्रवाई की गई तो राज्य स्तर पर हड़ताल की जाएगी।
पटवारी संघ के मुताबिक 3 अगस्त को तीन महीने के आश्वासन के बाद प्रदेशव्यापी हड़ताल स्थगित की गई थी। लेकिन एक महीने बीतने के बाद भी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से पटवारियों में नाराजगी है।
जियो टैग गिरदावरी का भी विरोध
संघ ने जियो टैग गिरदावरी को अव्यावहारिक बताते हुए इसकी अनिवार्यता हटाने की मांग की है। संघ का कहना है कि जब तक यह व्यवस्था नहीं हटाई जाती, पटवारी गिरदावरी का काम नहीं करेंगे।
वेतन और संसाधनों से जुड़ी मांगें भी उठाईं
पटवारी संघ ने सिर्फ स्वामित्व योजना ही नहीं, बल्कि अपनी दूसरी मांगों को भी ज्ञापन में शामिल किया है। इनमें वेतन विसंगति दूर करना, ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू, समयमान वेतनमान और लैपटॉप-मोबाइल जैसे जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा अतिरिक्त काम के लिए एक महीने के अतिरिक्त वेतन या भत्ते की मांग भी की गई है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
पटवारी संघ का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों के बावजूद लंबित Farmer ID के काम को लेकर कर्मचारियों पर मानसिक दबाव या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि मूल समस्याओं का समाधान होने और स्वामित्व योजना में निष्पादक की जिम्मेदारी से मुक्ति मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।







