दिग्गज नेताओं के मंच से MP के लिए 50 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट का ऐलान
मुंबई में जेपी नड्डा, देवेंद्र फडणवीस और मोहन यादव ने केमिकल सेक्टर को आगे बढ़ाने का प्लान रखा। बीना में 50 हजार करोड़ का निवेश आएगा।

केंद्र और राज्य मिलकर पूरे देश के औद्योगिक नक्शे को बदलने की कोशिश में, केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर बड़ा सा राजनीतिक और आर्थिक दांव लगा रहे हैं। मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में हुई “इंडिया केम-2026” की स्टेज पर यह एकजुटता, कुछ न कुछ साफ-साफ दिखी। तीन दिन के इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया, साथ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस , मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी संयुक्त रूप से दीप जलाया। उसी दौरान “केमिकल फ्रेटरनिटी रिपोर्ट” और फिक्की-ईवाई का नॉलेज पेपर भी रिलीज किया गया , बिना देर किये।
मध्य प्रदेश का मेगा दांव: बीना से आष्टा तक वाला औद्योगिक कॉरिडोर
मध्य प्रदेश को पुरानी “बीमारू राज्य” वाली छवि से बाहर निकालकर नया इंडस्ट्रियल हब बनाने की मुहिम में जुटे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को लुभाने वाला बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बुंदेलखंड और मध्य भारत को साधते हुए बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की पेट्रोकेमिकल परियोजना की बात कही है, जिसके जरिए हर साल 22 लाख टन से ऊपर पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार होंगे। इस प्लान के साथ, विजयपुर में गेल (GAIL) का गैस प्रोसेसिंग ढांचा और सीहोर के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना, राज्य के औद्योगिक फैलाव की रीढ़ जैसी भूमिका निभाएंगी। छोटे और मध्यम उद्यमियों (SME) को जोड़ने के लिए रायसेन के तामोट और ग्वालियर के बिलोवा में प्लास्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जबकि पीएम मित्रा पार्क के जरिए टेक्सटाइल सेक्टर को भी गति दी जा रही है।
साल 2014 के बाद जो तस्वीर बदली, और 2040 का “एक ट्रिलियन डॉलर” विजन
सत्र में सीएम मोहन यादव ने केंद्र की नीतियों और आंकड़ों का सहारा लेते हुए बताया कि साल 2014 में केमिकल और पेट्रोकेमिकल बाजार महज 120 अरब डॉलर का था, लेकिन अब केंद्र सरकार की नीतियों के चलते वह दोगुने से भी आगे निकल चुका है। 2014 से 2026 के बीच, इस सेक्टर में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है। वैश्विक मुश्किलों, और सप्लाई चेन की दिक्कतों को अवसर में बदलते हुए, प्रधानमंत्री के उस विजन में कि 2040 तक इस सेक्टर को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाना है, मध्य प्रदेश सबसे आगे बढ़कर योगदान देगा, यह दावा भी किया गया।
नीतिगत सुधार और श्रमिक सुरक्षा: अनुप्रिया पटेल का रुख
केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कारोबार को सुगम बनाना (Ease of Doing Business), उत्पादों की गुणवत्ता, और सुरक्षित उत्पादन पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन बड़ी औद्योगिक इकाइयों में खतरनाक रसायन इस्तेमाल होते हैं , वहाँ श्रमिकों को सुरक्षित तरीके से काम करने का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, खतरनाक औद्योगिक कचरे और समुद्री अपशिष्ट के निपटान के नियमों को बेहतर तालमेल के साथ सुलझाने की बात कही गई, और उद्योगों की हर समस्या का हल निकालने की प्रतिबद्धता जताई गई।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से देश का विकास: देवेंद्र फडणवीस का बयान
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यों के बीच निवेश को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक संकेत की तरह बताया। उनका कहना था कि यह देश के आर्थिक विकास के लिए शुभ है। महाराष्ट्र की ताकत का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 3,600 रसायन उद्योग काम कर रहे हैं, जिनका देश के केमिकल सेक्टर के सकल मूल्यवर्धन में 19 प्रतिशत और निर्यात में 17 प्रतिशत का योगदान है। इसी वजह से राज्य में करीब 3 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
वैश्विक मोर्चे पर भारत की धमक, और एफटीए (FTA): जेपी नड्डा
मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। वैश्विक व्यापार को बढ़ाने के लिए भारत ने ओमान, न्यूजीलैंड और यूके (UK) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ भी एफटीए को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज चल रही है।

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