भोपाल में चतुर्थ राष्ट्रीय HR–CSR सम्मेलन ‘अभ्युदय-2026’ का आयोजन, CM मोहन यादव ने किया शुभारंभ
भोपाल में अभ्युदय-2026 राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए CM मोहन यादव ने श्रीकृष्ण के जीवन पर शोध करने वाले विद्वानों और संस्थाओं को पूरा सहयोग देने की बात कही।

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शनिवार को दो दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर कॉन्फ्रेंस ‘अभ्युदय-2026’ का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर गहन शोध करने वाले शोधार्थियों और संस्थाओं को मध्यप्रदेश सरकार पूरा सहयोग देगी।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। ‘अभ्युदय-2026’ में भारतीय सभ्यतागत ज्ञान, आधुनिक प्रबंधन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक कल्याण को एक साथ जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। सम्मेलन में उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वान शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान इंडोनेशिया से आए पद्मश्री डॉ. अगुष इंद्र उद्याना ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक घंटी भेंट की। सम्मेलन का आयोजन यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंशिएंट विजडम, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन की भी सहभागिता है।
‘जहां गीता समाप्त होती है, वहीं से जीवन का अभ्युदय शुरू होता है’
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन समाज के लिए आदर्श है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन किया और जीवनभर चुनौतियों का सामना करते हुए समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण तत्कालीन लोकतांत्रिक परंपराओं के महान नायक थे। उन्होंने कंस का वध करने के बाद स्वयं सत्ता संभालने के बजाय व्यवस्था को उसके योग्य लोगों के हाथों में रहने दिया। श्रीकृष्ण का जीवन सिखाता है कि सत्ता से ज्यादा महत्वपूर्ण दायित्व निभाना और समाज के हित में काम करना है।
‘श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय को आगे बढ़ा रही सरकार’
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों और स्थलों पर गहन शोध की आवश्यकता है। सरकार ऐसे शोधार्थियों और संस्थाओं को पूरा समर्थन देगी, जो श्रीकृष्ण के जीवन वृत्त, विचारों और सामाजिक योगदान का अध्ययन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के शोध से नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
‘श्रीकृष्ण के जीवन से मिलती है कर्तव्य और मित्रता की सीख’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपने वचनों का मान रखा और मित्र सुदामा के साथ संबंधों में समानता तथा आत्मीयता का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा ने एक साथ शिक्षा ग्रहण की थी। यह प्रसंग सामाजिक समरसता और समान अवसरों की भावना को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से माता-पिता के प्रति सम्मान, मित्रता, अनुशासन, उद्यमशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलती है। सीएम नरकासुर के वध के प्रसंग को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के इन पहलुओं पर देशभर में चर्चा और अध्ययन होना चाहिए।
मध्यप्रदेश में कौशल विकास और रोजगार पर जोर
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में 18 खेल अकादमियां संचालित हैं और राज्य सरकार ने तीन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने भोपाल स्थित ग्लोबल स्किल पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में टाटा समूह के प्रतिनिधि ने भी मध्यप्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में विस्तार की मंशा जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के साथ युवाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
योग, शिक्षा और सामाजिक सुधार पर भी रखी बात
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, योग को बढ़ावा देने और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि योग और वेलनेस को प्रोत्साहित करने के प्रयास लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं। प्रदेश में आयुष महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और सामाजिक विकास के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, पद्मश्री डॉ. एचआर नागेंद्र, अद्वैत गणनायक सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
ESG और भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने की पहल
‘अभ्युदय-2026’ का उद्देश्य पर्यावरण, सामाजिक कल्याण और सुशासन यानी ESG के सिद्धांतों को भारतीय सभ्यतागत ज्ञान और नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ना है। सम्मेलन में कर्मयोग, लोकसंग्रह और धर्म जैसे विचारों को कॉर्पोरेट नेतृत्व, मानव संसाधन प्रबंधन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने पर चर्चा की जा रही है।
इसका लक्ष्य सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा समावेशी विकास के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार करना है। दो दिवसीय सम्मेलन 25 अक्टूबर तक जारी रहेगा।


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