नर्सिंग फर्जीवाड़े पर जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई: अपात्र कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग पर नया मॉड्यूल बनाने निर्देश
मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने अपात्र कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग पर नया मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

Jabalpur High Court: मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन में फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने छात्रों की पढ़ाई और ट्रेनिंग को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन और मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल को आपसी समन्वय से नया शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार करने को कहा है। जस्टिस आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की युगल पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष अपने प्रस्ताव और आपत्तियां साझा करें। संशोधित मॉड्यूल अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने पेश करना होगा।
छात्रों की शिफ्टिंग और ट्रेनिंग पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों के स्थानांतरण और डबल शिफ्ट में प्रशिक्षण को लेकर स्टेटस रिपोर्ट और शिफ्टिंग मॉड्यूल पेश किया।
इस पर लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल ने आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने प्रशिक्षण की पारदर्शिता, छात्रों की पसंद, जरूरी सुविधाओं और ट्रेनिंग पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाए।
बैंक गारंटी से खर्च वसूलने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि अपात्र कॉलेजों के छात्रों की आगे की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर होने वाला खर्च संबंधित कॉलेजों की बैंक गारंटी राजसात करके वसूला जाए। साथ ही, शिफ्टिंग की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिल सके।
क्लिनिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर जोर
हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्ष आपस में समन्वय बनाएं। प्रस्तावों और आपत्तियों पर चर्चा के बाद संशोधित मॉड्यूल तैयार किया जाए। कोर्ट ने शिफ्टिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता, शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल ट्रेनिंग के स्तर को बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, दोषी संस्थानों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी रेखांकित की। मामले में नर्सिंग काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।

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