MP TET 2026 Impact: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 1998-2009 के डेढ़ लाख शिक्षकों को देनी होगी पात्रता परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए MP TET 2026 का ऐलान किया है। 12 अक्टूबर को 150 अंकों की यह बिना निगेटिव मार्किंग वाली परीक्षा आयोजित की जाएगी।
मध्य प्रदेश की राजनीति और शिक्षा विभाग में उस वक्त बड़ी हलचल मच गई , जब राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े निर्देश के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा का ऐलान करना पड़ा , यानी MP TET 2026। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने इस परीक्षा का पूरा टाइम टेबल भी निकाल दिया है , और इसके पीछे सीधा असर सूबे के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य पर माना जा रहा है। राजनीतिक नज़रिये से देखें तो ये आदेश , 1998 से 2009 के बीच की गई उन पुरानी नियुक्तियों पर एक बड़े निशान की तरह है , जिनको अब किसी न किसी तरह अपनी नौकरी बचाने के लिए पात्रता साबित करनी होगी । आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से 4 सितंबर के बीच चलेगी।
1998-2009 बैच वाले शिक्षक और पात्रता साबित करने का दबाव
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 1998 से 2009 के बीच सरकारी व्यवस्था के तहत नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अब हजारों शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) परीक्षा देना मानो अनिवार्य कर दिया गया है। जिन शिक्षकों की भर्ती पुरानी नीतियों के सहारे हुई थी, उनको अपनी योग्यता साबित करने के लिए 21 अगस्त से 4 सितंबर की तय खिड़की के अंदर ऑनलाइन आवेदन करना ही होगा , वरना उनकी सेवा पर खतरा मंडराने की बात सामने आ रही है।
1000 रुपये के शुल्क वाला आर्थिक दबाव, और 12 अक्टूबर की डेडलाइन
कर्मचारी चयन मंडल ने इस राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव को लागू करते हुए शिक्षकों के लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक आवेदन में संशोधन का मौका दिया है। मगर परीक्षा में बैठने वाले हर अभ्यर्थी पर 1000 रुपये परीक्षा शुल्क का बोझ भी रहेगा। शिक्षा विभाग के जारी कैलेंडर के मुताबिक सरकार ने 12 अक्टूबर को ये परीक्षा कराने का बड़ा फैसला लिया है। आवेदन की प्रक्रिया के साथ ही सरकार तरफ से विस्तृत दिशा-निर्देश भी दे दिए जाएंगे, ये बात स्पष्ट की गई है।
निगेटिव मार्किंग को हटाकर मिली बड़ी राहत
इस पूरे माहौल में जब दबाव और मानसिक तनाव बढ़ रहा है, तब राज्य सरकार ने शिक्षकों को थोड़ी राहत भी दे दी है। प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 150 अंकों की होगी, और इसमें कुल 150 ही प्रश्न रहेंगे। 2 घंटे 30 मिनट की इस परीक्षा में सरकार ने निगेटिव मार्किंग का कोई प्रावधान नहीं रखा है। गलत जवाब पर अंक न काटे जाने का ये फैसला उन पुराने शिक्षकों के लिए संजीवनी जैसा माना जा रहा है जो काफी समय से परीक्षा वाले माहौल से दूर रहे हैं।
आरक्षण नीति के मुताबिक पासिंग मार्क्स का निर्धारण
परीक्षा में सफलता के लिए सरकार ने आरक्षण से जुड़ी शर्तों का स्पष्ट पालन किया है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए पासिंग मार्क्स 50 प्रतिशत तय किए गए हैं। वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को इस मुश्किल परीक्षा से पार पाने के लिए 60 प्रतिशत अंक लाने होंगे। कुल मिलाकर ये कवायद लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिहाज़ से बहुत अहम मानी जा रही है।
