सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला, रोजगार बढ़ाने के लिए मुरैना की शुगर मिल होगी चालू
मध्य प्रदेश सरकार ने मुरैना की बंद कैलारस शुगर मिल को दोबारा चलाने का बड़ा फैसला लिया है। एमएसएमई विभाग ने इसे 30 साल की लीज पर देने के लिए इच्छुक निवेशकों से प्रस्ताव मांगे हैं।

राजनीतिक और औद्योगिक नजरिए से मुरैना जिले की लंबे समय से बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की कवायद अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देश के बाद एमएसएमई विभाग ने मिल को लीज पर देने की प्रक्रिया का आगाज कर दिया है। सरकार की स्पष्ट सोच है कि इस मिल के दोबारा चालू होने से इलाके में औद्योगिक गतिविधियों को संजीवनी मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
19 अगस्त की कैबिनेट के फैसले के बाद आगे बढ़ी नीति
कैलारस शुगर मिल के भविष्य को लेकर 19 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया गया था। इस फैसले के तहत मिल की जमीन और संपत्तियों का पूरा अधिकार एमएसएमई विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। अब सरकार ने मिल को फिर से शुरू करने के लिए निवेशकों और काम करने की इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
30 साल की लीज का प्रावधान और सरकारी शर्तें
एमएसएमई विभाग की नीतियों के मुताबिक कैलारस शुगर मिल को 'जैसी है, जहां है' की तर्ज पर ही लीज पर देने की योजना है। मिल की शुरुआती लीज अवधि 30 साल रखी गई है। हालांकि, काम की प्रगति और परियोजना की जरूरत के आधार पर इसे आगे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा जा सकता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी ऐसी कंपनी या निवेशक का चयन करना है, जो इस मिल का सफल संचालन कर सके।
15 सितंबर तक तय की गई है ऑनलाइन प्रस्ताव की डेडलाइन
मिल को लीज पर लेने का मन बना रहे निवेशकों और कंपनियों के लिए विभाग ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक पक्ष विभाग के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव पारदर्शी तरीके से जमा कर सकते हैं। कैलारस शुगर मिल के पुनरुद्धार के लिए इन ऑनलाइन प्रस्तावों को जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई है।
निवेशकों को मिलेगी मिल की साइट के निरीक्षण की छूट
सरकार प्रस्ताव देने से पहले इच्छुक निवेशकों को मिल की वास्तविक स्थिति और वहां उपलब्ध संसाधनों को समझने का पूरा मौका दे रही है। इसके लिए बाकायदा साइट निरीक्षण की व्यवस्था भी की गई है। बता दें कि यह मिल मुरैना जिले में एनएच-552 पर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। यहां फैक्ट्री बिल्डिंग, प्लांट और मशीनरी के साथ-साथ करीब 12.86 हेक्टेयर की बड़ी जमीन उपलब्ध है।
दोबारा शुरू होने पर बदलेंगे रोजगार के समीकरण
कैलारस शुगर मिल के दोबारा शुरू होने से आसपास के पूरे क्षेत्र को भारी आर्थिक फायदा मिलने की उम्मीद है। इस मिल के सुचारू संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही इसका सबसे ज्यादा फायदा गन्ने से जुड़े किसानों, स्थानीय कारोबारियों और इलाके के परिवहन क्षेत्र को मिलने की संभावना है।
बंद उद्योगों को पटरी पर लाने का सरकारी फोकस
राज्य सरकार का इस समय पूरा फोकस प्रदेश की बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने और उपलब्ध सरकारी संपत्तियों का बेहतर आर्थिक इस्तेमाल करने पर है। कैलारस शुगर मिल को फिर से शुरू करने की यह प्रशासनिक प्रक्रिया भी इसी दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सबकी नजर 15 सितंबर तक आने वाले प्रस्तावों और उसके बाद होने वाली आगे की प्रक्रिया पर है।
