जबलपुर में पत्नी ने पति को दी नई जिंदगी, अपनी किडनी देकर बचाई जान; ICU में मनाया करवा चौथ
जबलपुर की रश्मि गुप्ता ने पति दीपक को किडनी देकर नया जीवन दिया। ट्रांसप्लांट के बाद ICU में करवाचौथ की पूजा कर छलनी से पति का चेहरा देखा।

Jabalpur News: करवाचौथ पर सुहाग की लंबी उम्र के लिए चांद का दीदार करने की परंपरा तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक पत्नी ने अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए ऐसा त्याग किया, जो हर किसी की आंखें नम कर देगा। जिस पति की लंबी उम्र के लिए रश्मि गुप्ता ने करवाचौथ का व्रत रखा, उसी पति को उन्होंने अपनी एक किडनी देकर नया जीवन भी दिया। ट्रांसप्लांट के बाद खुद अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद रश्मि ने करवाचौथ की रस्म निभाई और ICU में भर्ती पति दीपक गुप्ता का चेहरा छलनी से देखकर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
दो साल से डायलिसिस पर थे दीपक
जबलपुर के शांति नगर निवासी 55 वर्षीय दीपक गुप्ता लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले करीब दो साल से उनका डायलिसिस चल रहा था। लगातार इलाज और बीमारी की परेशानी ने पूरे परिवार को चिंता में डाल रखा था। करीब सात महीने पहले दीपक की हालत और बिगड़ने लगी। ऐसे मुश्किल वक्त में रश्मि गुप्ता ने अपने पति को बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया। यह फैसला सिर्फ एक अंगदान नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी के साथ निभाए उस रिश्ते की मिसाल बन गया, जिसमें मुश्किल समय में साथ खड़े रहने का वादा हकीकत बनकर सामने आया।
25 अक्टूबर को हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
दीपक और रश्मि 24 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुए थे। डॉक्टरों ने 25 अक्टूबर को किडनी ट्रांसप्लांट किया। हालांकि, यह ऑपरेशन सामान्य नहीं था। डॉक्टर विशाल वडेरा के मुताबिक, दीपक के शरीर में कुछ ऐसी एंटीबॉडी मौजूद थीं, जो रश्मि की किडनी के खिलाफ प्रतिक्रिया कर सकती थीं। इस चुनौती से निपटने के लिए पहले प्लाज्माफेरेसिस की प्रक्रिया की गई और एंटीबॉडी कम करने के लिए विशेष इंजेक्शन दिए गए। इसके बाद ट्रांसप्लांट किया गया। किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल के अनुसार, रश्मि की किडनी लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन तकनीक से निकाली गई। पूरी सर्जरी में करीब साढ़े तीन से चार घंटे लगे।
24 घंटे में काम करने लगी नई किडनी
डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांसप्लांट के 24 घंटे के भीतर नई किडनी ने बेहतर तरीके से काम करना शुरू कर दिया। ऑपरेशन के तीसरे दिन दीपक का क्रिएटिनिन स्तर 1.0 दर्ज किया गया। फिलहाल उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ रही है और उनकी हालत में सुधार बताया गया है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि स्थिति ठीक रहने पर उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। दो साल तक डायलिसिस और बीमारी की तकलीफ झेलने वाले दीपक के लिए यह राहत किसी नई शुरुआत से कम नहीं है। और इस नई शुरुआत के पीछे उनकी पत्नी रश्मि का वह फैसला है, जिसने उनके परिवार को उम्मीद की एक नई वजह दी।
ICU में मनाया करवा चौथ
ऑपरेशन के बाद रश्मि खुद भी अस्पताल में भर्ती थीं। कमजोरी के कारण वह सामान्य रूप से चलने-फिरने की स्थिति में नहीं थीं, फिर भी उनके मन में पति के लिए करवाचौथ की पूजा करने की इच्छा थी। अस्पताल प्रबंधन ने उनके लिए पूजा की व्यवस्था की। रश्मि अस्पताल के कपड़ों और मास्क में व्हीलचेयर पर बैठकर अस्पताल परिसर पहुंचीं। उन्होंने चंद्रमा को अर्घ्य दिया और फिर ICU में पहुंचकर छलनी से पति का चेहरा देखा। यह वही चेहरा था, जिसके साथ उन्होंने जीवन बिताने का वादा किया था। इस बार उस चेहरे को देखने के पीछे सिर्फ करवा चौथ की परंपरा नहीं, बल्कि पति को मौत से लड़कर वापस जीवन की ओर आते देखने की खुशी और भावनाएं भी जुड़ी थीं।
पत्नी के त्याग से मिला नया जीवन
सफल ट्रांसप्लांट के बाद दीपक गुप्ता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें जो नया जीवन मिला है, वह उनकी पत्नी के त्याग की बदौलत है। वहीं, रश्मि गुप्ता ने कहा, 'हर बार मैं अकेले उपवास रखती थी, लेकिन इस बार हम दोनों ही दो दिन पहले से उपवास रखे हुए हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हमें मिला यह नया जीवन हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहे।' रश्मि के इन शब्दों में उस अनुभव की झलक है, जिससे गुजरते हुए एक परिवार ने बीमारी, ऑपरेशन और अनिश्चितता के बीच उम्मीद को थामे रखा।
करवा चौथ पर प्यार और साथ की अनोखी मिसाल
करवाचौथ पर चांद देखकर पति की लंबी उम्र की कामना करना सदियों पुरानी परंपरा है। जबलपुर की रश्मि गुप्ता की कहानी में यह परंपरा एक अलग ही अर्थ लेती नजर आती है। उन्होंने पूजा और व्रत के साथ-साथ अपनी किडनी देकर पति को जिंदगी का एक और मौका दिया। यह कहानी केवल एक सफल किडनी ट्रांसप्लांट की नहीं, बल्कि उस भरोसे और साथ की है, जो मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी कायम रहता है। रश्मि ने करवाचौथ पर अपने पति का चेहरा छलनी से देखा, लेकिन उससे पहले अपने त्याग से उनके जीवन में नई सुबह की उम्मीद जगाई।



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